परिचय:
स्वच्छ और स्वस्थ समाज ही सशक्त समाज है।
हमारा उद्देश्य स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण जागरूकता फैलाना है।
गतिविधियाँ:
- गांव और शहर में सफाई अभियान
- स्वास्थ्य और पोषण शिविर
- रोग रोकथाम और टीकाकरण जागरूकता
- प्लास्टिक मुक्त अभियान
लाभ:
- स्वस्थ और स्वच्छ जीवनशैली अपनाई जाती है
- बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं में कमी आती है
- बच्चों और परिवारों में hygiene और sanitation का महत्व समझ आता है
सफलता की कहानी:
हमारे प्लास्टिक मुक्त अभियान ने तीन गांवों में प्लास्टिक उपयोग में 50% कमी की और लोगों को reusable materials अपनाने के लिए प्रेरित किया।
शेख़-उल-हिंद और ट्रेन के वॉशरूम की सफ़ाई की कहानी
यह घटना उस समय की है जब भारत अंग्रेज़ों के शासन में था। उस दौर में ट्रेनों में भारतीय यात्रियों के लिए वॉशरूम बहुत गंदे रखे जाते थे, जबकि अंग्रेज़ अधिकारियों के लिए अलग और साफ़ व्यवस्था होती थी।
घटना:
एक बार शेख़-उल-हिंद मौलाना मुहम्मद हसन देवबंदी ट्रेन से यात्रा कर रहे थे। यात्रा के दौरान उन्होंने देखा कि भारतीय यात्रियों के लिए बना ट्रेन का वॉशरूम बहुत गंदा है।उनके साथ मौजूद कुछ लोगों ने कहा:
“हज़रत, आप रहने दीजिए, यह काम सफ़ाईकर्मियों का है।”
🔹 शेख़-उल-हिंद का उत्तर
मौलाना ने बहुत विनम्रता लेकिन दृढ़ता से कहा:
“गंदगी को देखकर मुँह मोड़ लेना इल्म नहीं है, उसे साफ़ करना ही सच्ची सेवा है।”
🔹 उन्होंने क्या किया
उन्होंने खुद पानी मंगवाया अपने हाथों से ट्रेन के वॉशरूम को साफ़ किया बिना किसी झिझक या अहंकार के यह काम किया यात्रियों और साथ मौजूद लोगों ने यह देखकर गहरी लज्जा और प्रेरणा दोनों महसूस की।
इस घटना से मिलने वाली सीख
✔ स्वच्छता का महत्व
सफ़ाई कोई छोटा काम नहीं है स्वच्छता हर इंसान की ज़िम्मेदारी है
✔ समानता और विनम्रता
बड़े पद और ज्ञान के बावजूद उन्होंने खुद को आम लोगों से अलग नहीं माना
✔ सामाजिक “सफाई”
उन्होंने यह संदेश दिया कि समाज को गंदगी, आलस्य और अहंकार से साफ़ करना ज़रूरी है
निष्कर्ष :
ट्रेन के वॉशरूम की यह घटना बताती है कि शेख़-उल-हिंद मौलाना मुहम्मद हसन देवबंदी: केवल उपदेश नहीं देते थे, खुद करके दिखाते थे स्वच्छता को इज़्ज़त और ज़िम्मेदारी मानते थे समाज को कर्म और चरित्र से बदलते थे यह कहानी आज भी स्वच्छ भारत, नागरिक कर्तव्य और मानवीय समानता का शक्तिशाली संदेश देती है।